महानिदेशक का संदेश

वन भारत की प्राकृतिक विरासत और पारिस्थितिक सुरक्षा का अभिन्न अंग हैं। वे जैव विविधता और आजीविका को बनाए रखते हैं, जल सुरक्षा में योगदान देते हैं तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वनों के संरक्षण और सतत प्रबंधन के लिए विश्वसनीय जानकारी और वैज्ञानिक आकलन आवश्यक है।
पिछले कई दशकों में, भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने देश के वन संसाधनों के आकलन और निगरानी के लिए सुदृढ़ राष्ट्रीय क्षमताओं का विकास किया है। वन आवरण आकलन, वन इन्वेंट्री, भू-स्थानिक मानचित्रण, वन अग्नि निगरानी, कार्बन आकलन तथा अन्य विशिष्ट अध्ययनों के माध्यम से भारतीय वन सर्वेक्षण उचित निर्णय लेने में सहायता हेतु महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है।
उपग्रह सुदूर संवेदन, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और डेटा विश्लेषण में हो रही प्रगति से वन निगरानी एवं आकलन की प्रक्रिया निरंतर बेहतर हो रही है। भारतीय वन सर्वेक्षण वैज्ञानिक कठोरता और क्षेत्रीय सत्यापन के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग करेगा, ताकि आकलनों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
भारत वन स्थिति रिपोर्ट, निर्णय सहायता प्रणाली (Decision Support System) और ई-ग्रीन वॉच (e-Green Watch), भारतीय वन सर्वेक्षण की अन्य तकनीकी सेवाओं के साथ, भारत के वनों और वृक्ष संसाधनों को समझने के लिए एक व्यापक ज्ञान-आधार प्रदान करते हैं।
मुझे विश्वास है कि हितधारकों के साथ घनिष्ठ सहयोग तथा वैज्ञानिक विशेषज्ञता और क्षेत्रीय अनुभव के समन्वय के माध्यम से भारतीय वन सर्वेक्षण प्रभावी वन प्रबंधन और भारत के वन एवं वृक्ष संसाधनों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार को और अधिक सुदृढ़ करता रहेगा।
भारतीय वन सर्वेक्षण
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
भारत सरकार

